एक नेत्रहीन बालिका


एक नेत्रहीन बालिका , जिसके पीठ पर एक नोटिस लिखकर चिपका दिया गया था | यह नोटिस उसके पिता के द्वारा लिखा गया था, उसमे लिखा था “मैं इसके नेत्रहीन होने से बहुत परेशान हूँ | मैं अब इसकी देखभाल नहीं कर सकता हूँ,  इसलिए इसको मैं इस तरह छोड़ रहा हूँ” | जब वह  बालिका इधर – उधर भटक रही थी, तभी किसी ने उसको देखा और Child  Help Line  “1098” को फोन किया | तब उस बालिका को शेल्टर होम में भर्ती किया गया और संगठन की तरफ से कार्यवाही की गयी | उस बालिका के पिता के बारे में पता किया गया |  उसकी काउंसलिंग की गयी और आगे से ऐसा न करने के लिए कहा गया | यदि भविष्य में ऐसा किया तो उसके विरुद्ध कार्यवाही की जायगी |
 
किसी भी नेत्रहीन व्यक्ति की देखभाल करना आसान नहीं होता हैं |   इस समस्या का हल उस बालिका के पिता ने निकला था क्या वो सही था ? इस प्रकार से समस्या तो जहां के तहां ही रही,  केवल हमारे आँखों के सामने दिखाई नहीं दे रही है |
 

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