Archive for the ‘Uncategorized’ Category

आज हम कितनी ही बातें नारी स्वतंत्रता के विषय में कर ले, लेकिन क्या वास्तव में नारी स्वतंत्र हो पायी है। बचपन से लेकर युवावस्था तक अपने पिता और भाईयों के कहे अनुसार चलती है।छोटी-छोटी बातों पर उन पर निर्भर रहती  है। वास्तव में उसे जिंदगी के बहुत जरूरी कामों की सीख ही नहीं  दी जाती है। घर के कामों तक ही उसको सीमित रखा [...]

आज बहुत शुभ तिथि है, अक्षय तृतीया जिसका अर्थ है ऐसी तिथि जिसका कभी क्षय न हो। इश्वर से बस हमारी ये ही प्राथना हो कि इस तिथि की तरह ही हमारे देश के बच्चों का बचपन और  भविष्य दोनों ही अक्षय हो।   आज के दिन पूरे देश के विभिन्न हिस्सों में छोटे-छोटे बच्चों को [...]

अभिभावक-शिक्षक मुलाकात एक स्वस्थ मुलाक़ात न होकर आरोप-प्रत्यारोप में बदल गयी है। विशिष्ट रूप से यह  मुलाक़ात किसी भी विद्यार्थी का सम्पूर्ण विकास कैसे हो इस बात पर आधारित होनी चाहिए। सभी छात्रों की समस्याओं को एक ही तराज़ू में नहीं तोला जा सकता है। प्रत्येक  छात्र के सोचने का ढंग विशिष्ट होता है। अध्ययन,  व्यक्तित्व  सम्बन्धी समस्याये किसी विशिष्ट छात्र की विशिष्ट होती है, उसका [...]

पोती को मांसाहार बहुत पसंद है लेकिन दादाजी ने न जाने कितनी ही बार अपनी पोती को मांसाहार न करने के लिए समझाया, न जाने कितने ही तर्क अपनी पोती को दिए कि मांसाहार क्यों नहीं करना चाहिए। पोती के  मन में था कि मेरे दादाजी जो कह रहे हैं सही है मुझे उनके कहे अनुसार  मांसाहार [...]

हमारे घर पर सहायिका के रूप में काम करने वाली युवती जो कि साक्षर नहीं है। मेरा बहुत मन था कि उसे साक्षर करने में मेरा कुछ योगदान हो। उसको बहुत बार पढाई-लिखाई के लिए प्रेरित करने की कोशिश करती रही, लेकिन उसने कुछ महीनो तक मेरी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया। मैंने भी उस से इस बारे में बात करना उचित नहीं समझा। कुछ महीनों बाद उसने अचानक मुझसे  कहा कि वह मुझसे पढ़ना [...]

छठी कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा को पाठशाला से बहुत सारा गृह-कार्य करने को मिला। उसने मुझसे कहा “आज तो मैं अपना गृह कार्य  अपनी बड़ी दीदी से   करवा लूंगी”। मैंने कहा तुम्हे  अपना कार्य स्वयं करना चाहिए। तब उसने कहा ” मैं भी तो उसका बहुत सा काम करती हूँ। उसके ले टी.वी. चालू [...]

परस्थितिवश पुत्र को अपने माता-पिता के साथ रहना  पड़ा । आंशिक रूप से उन पर निर्भर रहना  पड़ा। “पिताजी” अपना ज्यादातर समय पूजा-पाठ और धार्मिक पुस्तकों को पढ़कर बिताते थे। भगवान की पूजा  करते समय दुग्धाभिषेक भी करते थे,जिसमें  कि दूध का उपयोग थोडा ज्यादा ही करते थे । एक दिन पिताजी से पुत्र ने कहा कि “आप पूजा के विधि-विधान में बहुत सा दूध उपयोग में लाते [...]

दोगलापन

Posted: मई 1, 2010 in Uncategorized

बालिका जो कि अपना पसंदीदा कार्टून चैनल देख रही थी, तभी अचानक बिजली गुल हो गयी। इनवर्टर होने कि वजह से बिजली आती रही लेकिन इनवर्टर पर ज्यादा लोड न हो इसलिए घर के बुजुर्ग  उसे टी.वी. बंद करने के लिए कह रहे थे। बड़े दुखी मन से उसने टी. वी. बंद कर दिया। कुछ देर पश्चात् [...]

साथ

Posted: अप्रैल 26, 2010 in Uncategorized

 एक छात्र मुझसे गणित विषय पढ़ने आता है। वह बहुत ही बेमन से गणित के प्रश्न हल करता है। कुछ दिन पहले ही एक और छात्र गणित पढ़ने आने लगा। पहले ही दिन मैंने देखा कि प्रथम छात्र बहुत मन लगाकर गणित कर रहा है। दूसरे दिन देखा तो आते ही बहुत उत्साह के साथ उसने [...]

प्रथम व्यक्ति

Posted: अप्रैल 25, 2010 in Uncategorized

बेटी प्रश्न करती है कि ” मेरे पिताजी हैं। मेरे पिताजी के पिताजी दादाजी हैं, दादाजी के भी पिताजी थे इस तरह दुनिया में जन्म लेने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था”।