आज बहुत शुभ तिथि है, अक्षय तृतीया जिसका अर्थ है ऐसी तिथि जिसका कभी क्षय न हो। इश्वर से बस हमारी ये ही प्राथना हो कि इस तिथि की तरह ही हमारे देश के बच्चों का बचपन और भविष्य दोनों ही अक्षय हो।
आज के दिन पूरे देश के विभिन्न हिस्सों में छोटे-छोटे बच्चों को विवाह सूत्र में बाँध दिया जाता है। उनसे बचपन छीन लिया जाता हैं और इसके साथ ही उनका भविष्य भी। किसी के हृदय में एक कसक सी नहीं उठती है कि ऐसा हम न होने दे। अशिक्षित लोगो की तो बात ही छोड़ दे शिक्षित लोग भी इस और से अपनी आँखे मूँद लेते हैं। हम में से किसी को तो इसके विरोध में पहला कदम उठाना होगा। अपने-अपने क्षेत्र में भी ऐसा होने से रोक सके तो पूरे देश में ही इसके प्रति लोग जागरूक होंगे और न जाने कितने ही मासूमों की जिंदगी बर्बाद होने से बच जायेगी।
बाल-विवाह में सबसे ज्यादा दुर्गति होती है कन्याओं की। बाल विवाह होने पर दुर्भाग्यवश बालिका विधवा हो जाती है तो उसकी क्या स्थिति होती है उसको समझने के लिए स्वस्थ मन और मस्तिष्क होना आवश्यक है। हमारे देश में किसी लड़की का पुनर्विवाह होना भी एक बहुत बड़ी समस्या है। इस प्रकार से तो उस लड़की का भविष्य चौपट ही हो जाता है।