पोती को मांसाहार बहुत पसंद है लेकिन दादाजी ने न जाने कितनी ही बार अपनी पोती को मांसाहार न करने के लिए समझाया, न जाने कितने ही तर्क अपनी पोती को दिए कि मांसाहार क्यों नहीं करना चाहिए। पोती के मन में था कि मेरे दादाजी जो कह रहे हैं सही है मुझे उनके कहे अनुसार मांसाहार नहीं करना चाहिए। पोती ने अपने दादाजी की बातों पर बहुत ध्यान दिया और वो मांसाहार करने से हिचकिचाने लगी। लेकिन एक दिन दादी ने दादाजी से मुर्गी के अंडे लाने के लिए कहा और दादाजी ख़ुशी-ख़ुशी अंडे ले आये। यह सब पोती देख रही थी, जब उसने दादाजी को अंडे लाते हुए देखा तो वह बहुत दुखी हुयी और बस दादाजी से रो-रोकर पूछती रही दादाजी आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? आप दादी के कहने पर अंडे क्यों लेकर आये है, मुझे तो आप खाने के लिए मना करते है?